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मस्ती की पाठशाला: ICMR का दावा तीसरी लहर से बचपन सुरक्षित, सर्वे में 50 पर्सेंट से अधिक बच्चोें में एंटीबॉडी मिले, 6 से 17 साल के बच्चे संक्रमण से खुद लड़ने में सक्षम

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दिल्ली: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR ने मंगलवार को 21 राज्यों के 70 जिलों में जून-जुलाई में हुए सीरो-सर्वे की रिपोर्ट रिलीज़ की है। सीरो-सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक़ 67 पर्सेंट आबादी में एंटीबॉडी डेवलेप हुई है। इसका मतलब […]

दिल्ली:

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR ने मंगलवार को 21 राज्यों के 70 जिलों में जून-जुलाई में हुए सीरो-सर्वे की रिपोर्ट रिलीज़ की है। सीरो-सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक़ 67 पर्सेंट आबादी में एंटीबॉडी डेवलेप हुई है। इसका मतलब हुआ ये आबादी संक्रमण का शिकार हो चुकी है और वायरस से लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी भी विकसित हो गए। इस आबादी का बड़ा हिस्सा बच्चों का भी है।

इस सर्वे के आधार पर ICMR के डीजी डॉ बलराम भार्गव ने बच्चों के स्कूल खोलने को लेकर कहा है कि छोटे बच्चे वायरस का मुकाबला आसानी से कर सकते हैं क्योंकि छोटे बच्चों में एडल्ट्स के मुकाबले संक्रमण का खतरा कम है। डीजी भार्गव ने कहा कि यूरोप में कोरोना केस बढ़ने के बावजूद प्राइमरी स्कूल खोले गए हैं। डॉ भार्गव के अनुसार पहले प्राइमरी स्कूल और इसके बाद सेकेंडरी स्कूल खुल सकते हैं।
पहले स्कूल टीचर्स और स्टाफ का टीकाकरण होना चाहिए
डॉ भार्गव ने कहा कि बच्चोें से ज्यादा संक्रमण का ख़तरा बड़ों को है लिहाजा स्कूल खोले जाने से पहले स्कूल टीचर्स और स्टाफ का सौ पर्सेंट टीकाकरण कर दिया जाना चाहिए।
सीरो सर्वे के अनुसार 6 से 9 वर्ष के 57.2 पर्सेंट और 10 से 17 साल के 61.6 पर्सेंट बच्चोें में एंटीबॉडी मिली हैं।
वैसे स्कूल खोलने को लेकर सीरो सर्वे के मुताबिक़, ICMR के ताजा सुझाव के ठीक उलट हो
 रहा है। जो भी राज्य स्कूल खोल रहे वे 10वीं से 12वीं तक के स्कूल खोल रहे

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